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हमारे बारे में


कंपनी के बारे में

राज्य के स्वामित्व वाली कोयला खनन निगम कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) नवंबर, 1975 में अस्तित्व में आया । अपनी स्थापना के वर्ष में 79 मिलियन टन (एमटी) के साधारण उत्पादन के साथ शुरूआत करने वाली कोल इण्डिया लिमिटेड आज विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक तथा 272445 श्रमशक्ति (01 अप्रैल 2020 को) के साथ सबसे बड़े कॉर्पोरेट नियोक्ताओं में से एक है । सीआईएल अपनी अनुषंगी कंपनियों के माध्यम से भारत के आठ (8) राज्यों में फैले 84 खनन क्षेत्रों में कार्य करती है । कोल इंडिया लिमिटेड के पास 352 खदानें (1 अप्रैल, 2020 तक) हैं, जिनमें से 158 भूमिगत, 174 खुली (ओपेनकास्ट) और 20 मिश्रित खदानें हैं । इसके अतिरिक्त, सीआईएल 12 कोयला वाशरी (10 कोकिंग कोल और 2 नॉन-कोकिंग कोल) का संचालन करता है तथा कार्यशालाओं, अस्पतालों इत्यादि जैसे अन्य प्रतिष्ठानों का भी प्रबंधन करता है । सीआईएल में 26 प्रशिक्षण संस्थान और 84 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र हैं । सीआईएल द्वारा संचालित भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट प्रशिक्षण संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट (आईआईसीएम), एक अत्याधुनिक प्रबंधन प्रशिक्षण का 'उत्कृष्ट केंद्र' है तथा यह बहु-अनुशासनिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है ।

सीआईएल एक महारत्न कंपनी है – यह उद्यमों का परिचालन विस्तार एवं वैश्विक दिग्गज के रूप में उभरने हेतु भारत सरकार द्वारा राज्य के स्वामित्व वाले चुनिंदा उद्यमों को प्रदत्त विशेषाधिकार है । देश के तीन सौ से अधिक केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों में से इस चुनिंदा क्लब में केवल दस सदस्य है ।

सीआईएल की सात उत्पादक अनुषंगी कंपनियां हैं, जिनके नाम ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) है तथा सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) नामक एक खान योजना और परामर्श कंपनी भी है । इसके अलावा, सीआईएल की मोजाम्बिक में कोल इंडिया अफ्रीकाना लिमिटाडा (CIAL) नाम की एक विदेशी अनुषंगी कंपनी है । असम की खदानों यानि नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स का प्रबंधन सीधे सीआईएल द्वारा किया जाता है ।

  • महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की चार (4) अनुषंगियाँ है : (i) एमजेएसजे कोल लिमिटेड (ii) एमएनएच शक्ति लिमिटेड (iii) महानदी बेसिन पावर लिमिटेड (iv) नीलांचल पावर ट्रांसमिशन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ।
  • एसईसीएल की दो अनुषंगियाँ हैं : (i) मैसर्स छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल) (ii) मैसर्स छत्तीसगढ़ ईस्ट - वेस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईडब्ल्यूआरएल) ।
  • सीसीएल की एक अनुषंगी कंपनी है :- झारखंड सेंट्रल रेलवे लिमिटेड ।

अद्वितीय रणनीतिक प्रासंगिकता

सीआईएल भारत के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 83% का उत्पादनकर्ता है, देश का लगभग 57% प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा कोयले पर निर्भर है, जिसमें सीआईएल अकेले प्राथमिक वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकता के 40% की आपूर्ति करता है । कोयले की हिस्सेदारी 2040 तक 48-54% के अधिकतम स्तर पर बने रहने की संभावना है तथा उपयोगिता क्षेत्र में ताप विद्युत उत्पादन क्षमता (थर्मल पावर जनरेटिंग कैपेसिटी) का कुल 76% हेतु जवाबदेहीता होगी । सीआईएल अंतरराष्ट्रीय मूल्यों से रियायती कीमतों पर कोयले की आपूर्ति करता है तथा भारतीय कोयला उपभोक्ताओं को मूल्य अस्थिरता से रक्षा करता है । यह अंतिम-उपयोगकर्ता उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है और "मेक इन इंडिया" एवं भारत निर्माण द्वारा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

उत्पादन और विकास

2019-20 के दौरान, सीआईएल ने चुनौतीपूर्ण एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य का 91% यानि 602.138 मिलियन टन (एमटी) कोयले का उत्पादन किया । सीआईएल ने दूसरी बार कोयला उत्पादन में 600 मिलियन टन (MT) के ऊँचाई को प्राप्त किया है । 30 मार्च 2020 को, सीआईएल ने 3.86 मिलियन टन का उत्पादन करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, जो कि कोल इंडिया की स्थापना से लेकर अब तक एक दिन में सर्वाधिक उत्पादन का रिकार्ड है । नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने 2019-20 के अपने-अपने वार्षिक उत्पादन लक्ष्यों को पार करते हुए निर्धारित लक्ष्यों का क्रमशः 102% और 103% प्राप्त किया । वित्तीय वर्ष में एनसीएल ने 108.05 मि. टन और डब्ल्यूसीएल ने 57.64 मि. टन का उत्पादन किया ।

31 मार्च 2020 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में कच्चे कोयले का ऑफ-टेक 581.411 मिलियन टन और ओवर बर्डेन रिमूवल (OBR) 1154.33 M Cum था । 2019-20 के दौरान कोयला और कोयला उत्पादों का डिस्पैच 582.48 मि. टन तथा पावर यूटिलिटीज (विशेष फारवर्ड ई-ऑक्शन सहित) के लिए डिस्पैच 465.72 मि. टन था । 31.3.2020 को बिजली घरों पर कुल कोयले का स्टॉक 45.01 मि. टन (28 दिन का) था, जो एक दशक में उच्चतम स्तर पर था ।

परियोजनाएँ

625.91 मि. टन वार्षिक क्षमता वाली 107 चालू खनन परियोजनाएँ हैं जिन्होंने वर्ष 2019-20 में 295.37 मि. टन का योगदान दिया है । इसके अलावा, 141 पूर्ण खनन परियोजनाएं हैं जिनकी वार्षिक क्षमता 300.12 मि. टन है । वित्त वर्ष 2023-24 तक सीआईएल के कोयला उत्पादन को बढ़ाकर 1 बिलियन टन पहुँचाने के उद्देश्य से, वित्त वर्ष 2019-20 में 485.84 मि. टन की लक्षित क्षमता वाले उनचास (49) नई भावी परियोजनाओं की पहचान की गई हैं।

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी:

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी के विकास और कोयले के वैकल्पिक उपयोग की दिशा में पहल के तहत, सीआईएल डानकुनी कोल कॉम्प्लेक्स (डीसीसी) में कोल-टू-मेथनॉल संयंत्र स्थापित करके एकल आधार पर कोयला-से-रसायन क्षेत्र में उद्यम की संभावनाएं तलाश रहा है । रानीगंज के कोयला क्षेत्रों से प्राप्त कोयले को सिन्गैस उत्पादन के लिए गैसीकृत किया जाएगा, तदुपरांत उसे मेथनॉल में परिवर्तित किया जाएगा ।

उपभोक्ता संतुष्टि:

सीआईएल के लिए उपभोक्ता संतुष्टि प्राथमिकता वाला क्षेत्र है, उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ावा देने के लिए खदान से प्रेषण बिंदु तक कोयला के गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाता है । सीआईएल के सभी उपभोक्ताओं को स्वतंत्र तृतीय पक्षीय नमूना एजेंसियों के माध्यम से गुणवत्ता मूल्यांकन कराने का विकल्प है । सीआईएल द्वारा एक पोर्टल 'उत्तम' लॉन्च किया गया है, ताकि कोयला कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को कोयला गुणवत्ता की जानकारी सुलभ हो सके ।

विदेश में कोयला परिसंपत्तियों का अधिग्रहण

सीआईएल रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र में कोकिंग कोल संपत्ति के अधिग्रहण, विकास और संचालन की प्रक्रिया में है । भारत के माननीय प्रधानमंत्री और रूसी संघ के माननीय राष्ट्रपति की अगुवाई में व्लादिवोस्तोक में 4 सितंबर, 2019 को कोल इंडिया लिमिटेड और सुदूर पूर्व निवेश एवं निर्यात एजेंसी (FEIEA - रूसी सरकार की एक एजेंसी) के बीच एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन निष्पादित किया गया है ।

जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन तक पहुँच

विश्व के अन्य हिस्सों से भिन्न, भारत में कोयला भंडार ज्यादातर जंगली भूमि क्षेत्रों या जनजातीय निवास क्षेत्रों में स्थित है । कोयला खनन करने के लिए लोगों को अनिवार्य रूप से विस्थापित होना पड़ता है, परंतु परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए सीआईएल ने संरचित पुनर्वास और पुनःस्थापन की नीति अपनाई है । कंपनी द्वारा ‘मानवीयता के साथ खनन' की प्रक्रिया को अपनाया गया है जिसमें सामाजिक रूप से स्थायी समावेशी विकास मॉडल के तहत आजीविका संबंधी निर्णय लेने की प्रक्रिया में परियोजना प्रभावित लोगों को हितधारक बनाया जाता है ।

पर्यावरण की देखभाल/ पर्यावरण प्रबंधन

कोयला खनन आमतौर पर प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण से जुड़ा है और कोयला खनन से पर्यावरण संबंधी चुनौतियां एक ज्ञात तथ्य हैं । कोल इंडिया एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट है जो खनन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का पालन करता है और धारणीय कोयला खनन प्रथाओं का पालन करता है । पर्यावरणीय प्रभावों को कम और न्यूनतम करने के लिए एक वैचारिक ढांचा है । तदनुरूप पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सीआईएल लगातार पर्यावरण के साथ तादात्म्य स्थापित करने और व्यवहार्य कोयला खनन को आगे बढ़ाने के लिए अपने दायित्व को दोहराया है। कोल इंडिया द्वारा हर साल ओबी डंपों पर, ढलान वाली सड़क पर, खदानों, आवासीय कॉलोनियों और अन्य उपलब्ध जमीनों पर व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम किए जाते हैं । मार्च, 2020 तक 39842 हेक्टेयर क्षेत्र में 99.6 मिलियन पेड़ लगाए गए हैं । 2019-20 के दौरान, 812.98 हेक्टेयर भूमि को आच्छादित करते हुए 1.98 मिलियन पेड़ लगाए गए हैं । वित्त वर्ष 2020-21 में, सीआईएल ने लगभग 740 हेक्टेयर में 1.8 मिलियन से अधिक देशी / स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है । सीआईएल ने ICFRE और NEERI जैसे प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों के साथ MoU समझौता भी किया है । वे कई वैज्ञानिक अध्ययनों में शामिल हैं और इको-रीस्टोरेशन साइट के विकास में और देशी प्रजातियों के पौधों के त्रि-स्तरीय वृक्षारोपण में भी सहायता करते हैं ।

सीआईएल मुख्यालय ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से आईएसओ 9001, 14001 और 50001 (गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) के लिए प्रमाणन प्राप्त किया है । 31 मार्च 2019 तक, हमारी चार अनुषंगी, ईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और एमसीएल एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (आईएसओ 9001, 14001 और ओएचएसएएस 18001) से प्रमाणित हैं । सीएमपीडीआई मुख्यालय तथा इसके सात आरआई आईएसओ 9001: 2015 से प्रमाणित हैं ।

ऊर्जा संरक्षण

ऊर्जा संरक्षण सीआईएल के लिए प्राथमिकता का क्षेत्र है और विशिष्ट ऊर्जा खपत में कमी की दिशा में विभिन्न उपाय किए गये हैं । स्ट्रीट लाइटिंग, कार्यालय और अन्य कार्य स्थानों, टाउनशिप के अधिकांश स्थानों पर अधिक वॉट के ल्यूमिनेयर / पारंपरिक प्रकाश फिटिंग को कम वॉट खपत वाले उचित क्षमता के एलईडी लाइट द्वारा बदल दिया गया है । 2018-19 में CMPDI द्वारा सीआईएल कार्यालय भवन और आसन्न आवासीय परिसर की ऊर्जा लेखा परीक्षा की गई थी और इस प्रक्रिया में, कार्यालय भवन की अनुबंध मांग 1450 केवीए से घटाकर 1200 केवीए कर दी गई है और आवासीय परिसर के लिए इसे 500 केवीए से घटाकर 250 केवीए कर दिया गया है । इन संशोधित अनुबंध मांगों को अक्टूबर 2019 में लागू किया गया है और इससे कार्यालय भवन और आवासीय परिसर के बिजली बिल में क्रमशः 11% और 30% की कमी आई है ।

वैकल्पिक स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए कई कदम उठाए गए हैं जैसे कि किलो-वाट स्केल रूफ टॉप सोलर प्लांट सफल संचालन में हैं । स्थापित रूफ टॉप की अनुषंगी वार कुल क्षमता ECL -197 kWp, BCCL - 6 kWp, CCL - 872.5 kWp, WCL - 1097 kWp, कोल इंडिया कार्यालय, कोलकाता -160 kWp, CMPDIL मुख्यालय और क्षेत्रीय संस्थान - 500 kWp हैं । 2019-20 में इन संयंत्रों से उत्पन्न कुल इकाइयाँ 24.469 लाख kWh हैं ।

ईंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी)

कोल इंडिया, सीआईएल तथा उसकी अनुषंगी कंपनियों में एक मजबूत अत्याधुनिक ईंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग तथा अस्पताल प्रबंधन प्रणाली के डिजाइन एवं कार्यान्वयन के पथ पर अग्रसर है । इस प्रयास का उद्देश्य व्यावसायिक संचालन के सभी पहलुओं को एक ही प्रणाली में आसानी से उपयोग करना है, जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं के मानकीकरण के माध्यम से सभी संगठनात्मक संसाधनों को प्रभावी ढंग से योजना, प्रबंधन और अनुकूलन करेगा । ‘प्रोजेक्ट पैशन’ का चरण- I साकार होने की अवस्था में है, कोल इंडिया द्वितीय चरण में ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल, सीएमपीडीआई, एनसीएल और एसईसीएल में एसएपी ईआरपी कार्यान्वयन के लिए प्रयासरत है ।

परियोजना निगरानी प्रणाली में सुधार:

सीआईएल ने कोयला परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए WEB आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली विकसित की है । अब तक, 150 करोड़ रुपये की लागत से सर्वर आधारित एमएस प्रोजेक्ट के माध्यम से 82 कोयला खनन परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है । सीआईएल MDMS पोर्टल के माध्यम से अपनी चल रही परियोजनाओं की भी निगरानी कर रहा है ।

सीआईएल की सुरक्षा नीति

सीआईएल के संचालन में सुरक्षा को प्रमुख महत्व दिया गया है उदाहरणतया देखा जा सकता है कि यह सीआईएल के लक्ष्य कथन में भी वर्णित है । सीआईएल की खानों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सुपरिभाषित सुरक्षा नीति है ।

फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी

कोल इंडिया लिमिटेड 2023-24 तक अपनी बड़ी खानों में कोयले की मौजूदा सड़क परिवहन से पाइप्ड कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से मशीनीकृत कोयला परिवहन पर स्विच करेगी । कंपनी ने इसके लिए पहले से ही प्रक्रिया शुरू कर दी है । इस उद्देश्य के लिए पैंतीस (35) ऐसी कोयला परियोजनाओं की पहचान की गई है जिनकी उत्पादन क्षमता 4 मिलियन टन प्रति वर्ष और उससे अधिक की है । यह कदम पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देता है और कोयला के संभावित छुट-पुट चोरी को रोकता है । इससे कोयले के मैकेनाइज्ड लोडिंग को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्रशिंग, कोयले की साइजिंग, पहले से तौले गये गुणवत्तापूर्ण कोयले की त्वरित लोडिंग जैसे फायदे होंगे ।

भावी दृष्टिकोण

सीआईएल राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा प्राप्ति में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है । 'विजन 2024' में वर्णित देश में कोयला क्षेत्र का मांग-प्रक्षेपण एवं तदनुरूप सीआईएल के मांग-प्रक्षेपण के आधार पर एक रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें सीआईएल ने देश में बढ़ते कोयले की मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2023-24 में 1 बिलियन टन (BT) उत्पादन की कल्पना की है । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, सीआईएल ने प्रमुख परियोजनाओं की पहचान की है और अन्य संबंधित मुद्दों का आकलन किया है ।